शनिवार, 15 जनवरी 2011


शंकरी , भेषज रूपा कहे

विषहंत्री कहे शिवदा तुम्हें गंगा ।

मंगला, दक्षा , कहे रेवती

बृहती, सुवृषा, वरदा तुम्हें गंगा ।

मन्दाकिनी , जग जाह्नवी जाने

बखाने शिवा, क्षणदा तुम्हें गंगा ।

देवनदी कोई देवधुनी

कोई हेमवती, ननदा , तुम्हें गंगा ॥

1 टिप्पणी:

  1. निसंदेह ।
    यह एक प्रसंशनीय प्रस्तुति है ।
    धन्यवाद ।
    satguru-satykikhoj.blogspot.com

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